Pukhraj Rules : बनते काम बिगड़ने लगेंगे, बढ़ जाएगा क्लेश…जानिए पुखराज पहनने का सही तरीका
Pukhraj pahnane ke niyam : ज्योतिष में पुखराज को देवगुरु बृहस्पति का प्रमुख रत्न माना जाता है. यह रत्न ज्ञान, विवेक, सम्मान, समृद्धि और सकारात्मक सोच का प्रतीक है. हालांकि पुखराज बिना कुंडली का परीक्षण कराए कभी धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति के लिए यह समान रूप से लाभकारी नहीं होता. लोकल 18 से अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि जिन लोगों में निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है या जो असमंजस की स्थिति में रहते हैं, उनके लिए उचित सलाह के बाद धारण किया गया पुखराज ही लाभकारी है. इसके प्रभाव से अच्छे लोगों का साथ मिलता है, बिगड़े हुए कार्य बनने लगते हैं, व्यक्ति के भीतर दान, धर्म और समाजहित की भावना विकसित होती है. अगर पुखराज किसी व्यक्ति की कुंडली के अनुकूल नहीं है तो इसके विपरीत नतीजे भी सामने आ सकते हैं. पेट से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, बनते हुए काम बिगड़ने लगते हैं और बिना कारण धन की हानि होने लगती है. परिवार में विवाद और क्लेश बढ़ सकते हैं, व्यापार या नौकरी में कठिनाइयां आ सकती हैं रामर्श के इसे पहनना उचित नहीं है.