Skip to content
-
Subscribe to our newsletter & never miss our best posts. Subscribe Now!
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/
lokmatdaily.in lokmatdaily.in lokmatdaily.in
lokmatdaily.in lokmatdaily.in lokmatdaily.in
  • Home
  • Home
Subscribe
Close

Search

National

Uttarakhand Earthquake: उत्तराखंड में बड़े भूकंप के संकेत, वैज्ञानिकों ने बताया कितना बड़ा है खतरा

By
July 21, 2026 4 Min Read
0

<p style=”text-align: justify;”>उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र के नीचे पृथ्वी की आंतरिक संरचना पर हुए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन में ऐसे संकेत मिले हैं, जो भविष्य में बड़े भूकंप के खतरे को समझने में अहम साबित हो सकते हैं. स्टडी के अनुसार, राज्य के नीचे मौजूद मेन हिमालयन थ्रस्ट (MHT) में लगातार भूगर्भीय तनाव (Stress) जमा हो रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यही वह सक्रिय भूगर्भीय क्षेत्र है, जहां भविष्य में मध्यम से बड़े भूकंप आने की सबसे अधिक संभावना रहती है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>यह अध्ययन जर्नल ऑफ एशियन अर्थ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है. नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI) के वैज्ञानिक डॉ. प्रांतिक मंडल और उनकी टीम ने उत्तराखंड के नीचे लगभग 180 किलोमीटर की गहराई तक पृथ्वी की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया. इसके लिए वर्ष 2017 से स्थापित 76 ब्रॉडबैंड भूकंप मापन केंद्रों से प्राप्त हजारों भूकंपीय संकेतों का विश्लेषण किया गया, जिनमें करीब 700 टेलीसीस्मिक (दूरस्थ) भूकंपों के आंकड़े शामिल थे.</p>
<p style=”text-align: justify;”><a href=”https://www.abplive.com/states/up-uk/rampur-jauhar-university-management-filed-a-petition-in-commissioner-court-against-demolition-order-ann-3163106″><strong>Jauhar University Case: ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट पहुंचा जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन, 28 जुलाई को होगी सुनवाई</strong></a></p>
<h3 style=”text-align: justify;”>8 से 20 किलोमीटर नीचे मिला असामान्य भूगर्भीय क्षेत्र</h3>
<p style=”text-align: justify;”>डॉ. प्रांतिक मंडल के अनुसार, अध्ययन में पाया गया कि उत्तराखंड के नीचे 8 से 20 किलोमीटर की गहराई पर चट्टानों के भीतर भूकंपीय तरंगों की गति सामान्य से 10 से 20 प्रतिशत कम है. इसके साथ ही Vp/Vs अनुपात 10 से 15 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया. वैज्ञानिकों का कहना है कि सामान्यतः कठोर चट्टानों में भूकंपीय तरंगें तेज गति से चलती हैं, जबकि जहां पानी, गर्म द्रव (Fluids) या कमजोर चट्टानें मौजूद होती हैं, वहां इनकी गति धीमी हो जाती है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>शोधकर्ताओं का मानना है कि इस गहराई पर पानी और रूपांतरित चट्टानों से निकले द्रव मौजूद हैं. ये द्रव फॉल्ट (भ्रंश) को कमजोर बनाकर उसकी फिसलन बढ़ा सकते हैं. इससे लंबे समय तक तनाव जमा होने की प्रक्रिया जारी रहती है और भविष्य में बड़े भूकंप की संभावना बढ़ सकती है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>सिस्मिक गैप में शामिल है उत्तराखंड</h3>
<p style=”text-align: justify;”>अध्ययन में कहा गया है कि उत्तराखंड सेंट्रल हिमालयन सिस्मिक गैप का हिस्सा माना जाता है. यह वह क्षेत्र है जहां लंबे समय से कोई बहुत बड़ा भूकंप नहीं आया है, लेकिन भूगर्भीय तनाव लगातार जमा हो रहा है. शोध के अनुसार, जिन क्षेत्रों के ऊपर पहले 6.5 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप दर्ज हो चुके हैं, उनके नीचे मेन हिमालयन थ्रस्ट में तनाव जमा होने के स्पष्ट संकेत मिले हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जानकारी भविष्य के भूकंपीय जोखिम का बेहतर आकलन करने में मदद करेगी.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>क्या है मेन हिमालयन थ्रस्ट (MHT)?</h3>
<p style=”text-align: justify;”>सरल भाषा में समझें तो हिमालय के नीचे एक विशाल भूगर्भीय फिसलन सतह मौजूद है, जिसे मेन हिमालयन थ्रस्ट (MHT) कहा जाता है. भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है. इसी प्रक्रिया के दौरान करोड़ों टन चट्टानों पर दबाव बनता रहता है. जब यह दबाव अचानक टूटता या मुक्त होता है, तब भूकंप आता है. वर्ष 1803 का गढ़वाल, 1991 का उत्तरकाशी और 1999 का चमोली भूकंप भी इसी भूगर्भीय व्यवस्था से जुड़े माने जाते हैं.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>30 से 55 किलोमीटर पर मिली &lsquo;मोहो&rsquo; सीमा</h3>
<p style=”text-align: justify;”>अध्ययन में पृथ्वी की ऊपरी ठोस परत (क्रस्ट) और उसके नीचे स्थित मेंटल के बीच की सीमा यानी मोहो (Moho) की पहचान भी की गई. वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तराखंड के नीचे यह सीमा 30 से 55 किलोमीटर की गहराई पर स्थित है. इसका अर्थ है कि हिमालय के नीचे पृथ्वी की ऊपरी परत सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक मोटी है, जो हिमालय जैसे ऊंचे पर्वतों को संरचनात्मक सहारा देती है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>130 से 180 किलोमीटर नीचे मिली एक और महत्वपूर्ण सीमा</h3>
<p style=”text-align: justify;”>शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने लिथोस्फीयर&ndash;एस्थेनोस्फीयर बाउंड्री (LAB) की भी पहचान की. यह सीमा उत्तराखंड के नीचे लगभग 130 से 180 किलोमीटर की गहराई पर मिली. लिथोस्फीयर पृथ्वी की कठोर बाहरी परत होती है, जबकि उसके नीचे अपेक्षाकृत नरम और गर्म एस्थेनोस्फीयर होती है, जिस पर टेक्टोनिक प्लेटें धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं. इस अध्ययन से हिमालय के नीचे प्लेटों की संरचना और उनकी गति को समझने में नई जानकारी मिली है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>&lsquo;डबल मोहो&rsquo; के भी मिले संकेत</h3>
<p style=”text-align: justify;”>शोधकर्ताओं ने कुछ स्थानों पर &lsquo;डबल मोहो&rsquo; जैसी संरचना के संकेत भी दर्ज किए हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ों वर्ष पहले भारतीय और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर के दौरान पृथ्वी की परतों के जटिल रूप से मुड़ने और एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने से ऐसी स्थिति बनी हो सकती है. हालांकि इस विषय पर अभी और विस्तृत शोध की आवश्यकता बताई गई है.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>भूकंप की भविष्यवाणी नहीं, जोखिम को समझने का अध्ययन</h3>
<p style=”text-align: justify;”>वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन किसी बड़े भूकंप के समय या तारीख की भविष्यवाणी नहीं करता. इसका उद्देश्य हिमालय के नीचे की भूगर्भीय संरचना, तनाव के संचय और भूकंपीय जोखिम को बेहतर ढंग से समझना है, ताकि भविष्य में आपदा प्रबंधन और <a title=”भूकंप” href=”https://www.abplive.com/topic/earthquake” data-type=”interlinkingkeywords”>भूकंप</a> संबंधी तैयारियों को और मजबूत बनाया जा सके.</p>
<p style=”text-align: justify;”><a href=”https://www.abplive.com/states/up-uk/varanasi-news-bhu-students-protest-against-lathi-charge-on-students-in-delhi-ann-3163092″><strong>Varanasi News: दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज का विरोध, BHU के छात्रों ने जताई नाराजगी; जमकर की नारेबाजी</strong></a></p>

Source

Author

Follow Me
Other Articles
Previous

Jauhar University Case: ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ कमिश्नर कोर्ट पहुंचा जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन, 28 जुलाई को होगी सुनवाई

Next

'बर्बर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले…', CJP के प्रदर्शन को लेकर BJP सरकार पर भड़के सपा विधायक

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • 'एक मिनट भी खड़ा नहीं हो पाएंगे अखिलेश यादव', चवन्नी वाले बवाल पर मीडिया के सामने क्या बोल गए RLD चीफ जयंत चौधरी?
  • मुरादाबाद का मीठी शॉट वाले दही गोलगप्पे मशहूर, सूजी और दर्जनों मसालों से होता है तैयार, खाने वालों की लगती है भीड़
  • 31 जिलों के किसान पहुंचे आलू बेचने, मगर सिर्फ 6 किसानों का ही हुआ सौदा, 45 फीसदी आलू कोल्ड स्टोरेज में रखे
  • मिर्जापुर के किसान चावल और मिर्च का नेपाल, बांग्लादेश व गल्फ देशों में कर रहे निर्यात, पिछले साल 2 करोड़ के उत्पाद भेजे
  • मिर्जापुर के विनायक को पढ़ाई के लिए मिलेंगे 1.20 करोड़, लंदन के लॉ ऑफ पीएचडी के लिए हुआ चयन

Recent Comments

No comments to show.

Archives

  • September 2026
  • August 2026
  • July 2026
  • June 2026

Categories

  • National
Copyright 2026 — lokmatdaily.in. All rights reserved. Blogsy WordPress Theme