बेटा कंप्यूटर प्रोग्रामर है, बहू वकील… फिर भी 85 साल की कल्पना आश्रम में रहने को मजबूर, सुनिए दर्दभरी कहानी
Varanasi News: कलयुग के कुछ कपूत जब अपने पैरों पर खड़े हो जाते हैं तो अपने माता-पिता का तिरस्कार कर देते हैं और उन्हें दर-दर की ठोकर खाने के लिए सड़कों पर छोड़ देते हैं. इन बुजुर्गों के लिए वृद्धाआश्रम होता है, जहां कई बुजुर्ग बची जिंदगी गुजारते हैं. यहां की कुछ कहानी ऐसी होती है, जो अंदर से झकझोर देती है. कुछ ऐसी ही कहानी है वाराणसी वृद्धाश्रम में रहने वाली कलकत्ता की रहने वाली कल्पना भट्टाचार्या की है.