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आज का एक्सप्लेनर:बांग्लादेश ने भारत से छीनकर चीन को क्यों दिया मोंगला पोर्ट; सिर्फ 80 किमी दूर बैठेगा चीन, ये कितनी बड़ी चिंता

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June 28, 2026 3 Min Read
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22 से 26 जून 2026 तक बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान चीन में थे। इसी दौरान बांग्लादेश ने अपने मोंगला पोर्ट का प्रोजेक्ट भारत से छीनकर चीन को दे दिया। यानी हमारे तट से महज 80 किमी दूर मोंगला पोर्ट पर चीन बैठेगा। भारत की ‘चिकन नेक’ से 100 किमी दूर तीस्ता नदी को भी चीन मैनेज करेगा। आखिर चीन इन इलाकों में क्या करने वाला है और ये भारत की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश ने भारत से मोंगला प्रोजेक्ट छीनकर चीन को क्यों दिया?
जवाब: 2015 में बांग्लादेश ने भारत से दो इकॉनमिक जोन बनाने के लिए समझौता किया था। इनमें एक मोंगला पोर्ट और दूसरा चटगांव पोर्ट का इलाका था। बांग्लादेशी अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, मोंगला प्रोजेक्ट की शुरुआत में भारत के पैसे से मोंगला पोर्ट से खुलना के बीच एक नई रेलवे लाइन बनी। 2018 में भारत सरकार ने मोंगला प्रोजेक्ट का ठेका हीरानंदानी ग्रुप को दिया।
मार्च 2022 में बांग्लादेश इकॉनोमिक जोन अथॉरिटी यानी BEZA और हीरानंदानी ग्रुप की कंपनी एविटा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता हुआ। हालांकि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट होने के चलते ये प्रोजेक्ट रुक गया। शेख हसीना तब भारत आ गई थीं और बांग्लादेश के अंतरिम राष्ट्रपति बने मुहम्मद यूनुस के दौर में इस प्रोजेक्ट पर बात आगे नहीं बढ़ी। हसीना के बाद एंटी इंडियन मानी जाने वाली खालिदा जिया की पार्टी BNP सत्ता में आई और फरवरी 2026 में उनके बेटे तारिक रहमान पीएम बने। BEZA के मुताबिक, भारतीय कंपनी तय शर्त के मुताबिक दो साल के भीतर काम शुरू नहीं कर पाई। इसी बीच जून 2025 में बांग्लादेश में तैनात चीनी दूतावास के ऑफिसर्स ने मोंगला पोर्ट पर एक चीनी इकॉनोमिक जोन बनाने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। 25 जून 2026 को तारिक रहमान के चीन दौरे के बीच BEZA और चीन की सरकारी कंपनी चाइना सिविल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (CCECC) के बीच पोर्ट के आसपास की 110 एकड़ जमीन पर इकॉनोमिक जोन बनाने का समझौता हुआ है। इसके अलावा 25 मार्च 2025 को मोंगला पोर्ट अथॉरिटी (MPA) और CCECC के बीच मोंगला पोर्ट के डेवेलपमेंट के लिए 370 मिलियन डॉलर के एक अलग प्रोजेक्ट पर भी समझौता हुआ था। हालांकि इस पर अब तक काम नहीं हुआ है। सवाल-2: अब चीन मोंगला पोर्ट पर क्या करने जा रहा है?
जवाब: चीन मोंगला पोर्ट पर 2 काम करेगा… 1. पोर्ट का डेवेलपमेंट 2. पोर्ट के पास इकॉनोमिक जोन 26 जून को बांग्लादेश-चीन के जॉइंट स्टेटमेंट में 2 और प्रोजेक्ट चीन को देने की बात कही गई है। इसमें लिखा है कि दोनों देश चटगांव में चीन के ‘इकॉनोमिक और इंडस्ट्रियल जोन’ को डेवेलपमेंट करेंगे। साथ ही चीन तीस्ता नदी के प्रबंधन में हर संभव मदद करेगा। सवाल-3: ये प्रोजेक्ट चीन को मिलना भारत के लिए चिंता की बात क्यों?
जवाब: भारत के लिए 4 बड़ी दिक्कतें हैं… 1. चीन के मुकाबले कूटनीतिक हार 2. बंगाल की खाड़ी में भारत के लिए नया खतरा 3. तीस्ता नदी प्रोजेक्ट से ‘चिकन नेक’ पर खतरा 4. भारत की बिजनेस कनेक्टिविटी को नुकसान सवाल-4: चीन के बढ़ते दबदबे से कैसे निपटेगा भारत?
जवाब: हिंद महासागर को भारत का ‘आंगन’ कहा जाता है, लेकिन यहां चीन अपनी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल’ कही जाने वाली स्ट्रैटजी के तहत बंदरगाह, हवाई पट्टी और नेवल बेस बना रहा है। चीनी कंपनियां हिंद महासागर में 17 बंदरगाहों में से 13 का डेवेलपमेंट कर रही हैं, जबकि बाकी प्रोजेक्ट्स में उनकी हिस्सेदारी हैं। हिंद महासागर में चीन की हरकतें भारत के लिए बड़ी चुनौती हैं। इसीलिए भारत भी कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। भारत की स्ट्रैटजी का नाम है- ‘नेकलेस ऑफ डायमंड’। हालांकि ये भारत सरकार का कोई घोषित प्रोजेक्ट या डॉक्ट्रिन नहीं है। ‘नेकलेस ऑफ डायमंड’ के तहत 4 बड़े काम हो रहे हैं… —- ये खबर भी पढ़ें… भास्कर एक्सप्लेनर- शेख हसीना भारत से कहां जाएंगी:बांग्लादेश की सत्ता अब कौन संभालेगा; 8 सवालों में आगे की कहानी पड़ोसी देश बांग्लादेश की कहानी हर गुजरते घंटे के साथ बदल रही है। करीब 2 महीने से चल रहे आरक्षण विरोधी आंदोलन हिंसक होने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा है। वो सेना के हेलिकॉप्टर से पहले अगरतला पहुंचीं और वहां से C-130J मिलिट्री विमान से गाजियाबाद के हिंडन मिलिट्री एयरबेस पर लैंड हुईं। पूरी खबर पढ़ें…

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